Welcome to MP Daily Live   Click to listen highlighted text! Welcome to MP Daily Live
छतरपुर
Trending

सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बकस्वाहा में डॉक्टर की कार्यशैली पर गंभीर सवाल ड्यूटी के दौरान सोते रहे डॉक्टर, नर्सों के जरिए दिया गया इलाज

सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बकस्वाहा में डॉक्टर की कार्यशैली पर गंभीर सवाल
ड्यूटी के दौरान सोते रहे डॉक्टर, नर्सों के जरिए दिया गया इलाज

*बकस्वाहा | रत्नेश जैन रागी संवाददाता*

सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बकस्वाहा में शनिवार सुबह स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली सामने आई, जहां गंभीर रूप से घायल मरीज को समय पर चिकित्सकीय उपचार नहीं मिल सका। इस घटना ने अस्पताल की कार्यप्रणाली और ड्यूटी पर तैनात चिकित्सक की जिम्मेदारी पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार शनिवार सुबह करीब 6:02 बजे ग्राम सुनवाहा निवासी नन्नेभाई लोधी खेत पर काम कर रहे थे, तभी बैल के हमले में वे गंभीर रूप से घायल हो गए। परिजन उन्हें तत्काल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बकस्वाहा लेकर पहुंचे। बताया गया कि घायल की स्थिति अत्यंत गंभीर थी और पेट की मांसपेशियां बाहर निकल आई थीं।

परिजनों का आरोप है कि उस समय अस्पताल में केवल एक नर्स मौजूद थी, जबकि ड्यूटी डॉक्टर डॉ. राजेंद्र चौधरी अपने कक्ष में सो रहे थे। कई बार आवाज देने के बावजूद डॉक्टर बाहर नहीं आए। बाद में नर्स द्वारा फोन करने पर डॉक्टर ने केवल फोन पर ही प्राथमिक उपचार कर मरीज को रिफर करने के निर्देश दे दिए।
कुछ समय बाद मीडिया कर्मियों के अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टर बाहर आए, लेकिन उन्होंने मरीज को प्रत्यक्ष रूप से नहीं देखा।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार डॉक्टर ने नर्स से ही उपचार की जानकारी ली और रिफर की प्रक्रिया शुरू कर दी। जब स्टाफ और मौजूद लोगों ने बताया कि घायल की मांसपेशियां पेट से बाहर आ चुकी हैं, तो डॉक्टर ने नर्स को घाव पैक करने के निर्देश दिए।

इस पर नर्स ने असमर्थता जताते हुए कहा कि इस प्रकार का गंभीर मामला उसके अनुभव में पहली बार है और वह ऐसा उपचार करने में सक्षम नहीं है। इसके बावजूद डॉक्टर ने बिना समुचित प्राथमिक उपचार के ही घायल को खुले घाव की अवस्था में जिला चिकित्सालय के लिए रिफर कर दिया।

घटना के बाद परिजनों और स्थानीय नागरिकों में भारी आक्रोश देखा गया। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते डॉक्टर स्वयं उपचार करते, तो मरीज की हालत और बिगड़ने से रोकी जा सकती थी। यह मामला सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टरों की उपलब्धता, जवाबदेही और संवेदनशीलता पर एक बार फिर सवाल खड़े करता है।
इस संबंध में जिला चिकित्सा अधिकारी राजेंद्र प्रसाद गुप्ता ने मामले की जांच कर आवश्यक कार्रवाई किए जाने की बात कही है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!
Click to listen highlighted text!