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फुटपाथ से हटाए जा रहे गरीब,लेकिन एक नाम पर पांच दुकानें किसके नियम?

बड़े और मजबूत हो रहे, छोटे उजड़ रहे नगर पालिका की नीति पर जनता नाराज़

दमोह: नगर पालिका क्षेत्र में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई को लेकर बड़ा असंतोष सामने आ रहा है। नगर पालिका द्वारा पुलिस प्रशासन की मौजूदगी में लगातार फुटपाथों पर दुकानें लगाने वाले गरीब और रोज़गार पर निर्भर लोगों को हटाया जा रहा है, लेकिन इसी बीच नगरपालिका की दुकान आवंटन व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। शहर में नगर पालिका की बड़ी संख्या में दुकानें वीते समय आवंटित की गई हैं, जिनमें से अधिकांश दुकानों का संचालन किरायानामा पर किया जा रहा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि कई प्रभावशाली व्यक्तियों के नाम पर एक ही व्यक्ति को तीन से पांच दुकानें आवंटित हैं, जिन्हें आगे किराए पर चढ़ाकर मनमाना किराया वसूला जा रहा है। सवाल यह है कि क्या एक व्यक्ति के नाम पर कई दुकानें आवंटित करना नियमसम्मत है?

नागरिकों का कहना है कि नगर पालिका ने आज तक यह सार्वजनिक नहीं किया कि कौन-कौन सी दुकानें किनके नाम पर आवंटित हैं। और कितनी दुकानें किरायानामा पर दी गई हैं। जबकि दूसरी ओर सड़क किनारे छोटे दुकानदारों को हटाकर पूरे परिवारों को बेरोज़गारी के कगार पर खड़ा किया जा रहा है।
छोटे व्यपारियो का आरोप है कि बड़े और प्रभावशाली लोग लगातार और मजबूत होते जा रहे हैं, जबकि छोटे और गरीब वर्ग पर कार्रवाई की जा रही है। सूत्रों के अनुसार जमीनी हकीकत यह है कि राजनीतिक रसूख वाले लोग लाभ उठा रहे हैं और गरीब वर्ग को व्यवस्था की मार झेलनी पड़ रही है। वहीं नगर पालिका और जिला प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। लोगों का कहना है कि मध्यप्रदेश सरकार द्वारा चलाई जा रही जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी न तो आम जनता तक सही ढंग से पहुंच रही है और न ही वास्तविक पात्र हितग्राहियों को पूरा लाभ मिल पा रहा है। यह भी सवाल उठ रहा है कि क्या नगर पालिका सीएमओ और जनप्रतिनिधियों को इन योजनाओं की पूरी जानकारी है या फिर व्यवस्था केवल दिखावे तक सीमित है।
राजनीतिक हलकों में भी हलचल देखने को मिली, जब मंगलवार को स्वयं भाजपा जिला अध्यक्ष कलेक्टर के समक्ष अपनी बात रखने पहुंचे। जिले में चार विधायक, दो मंत्री, एक सांसद और जिला पंचायत अध्यक्ष होने के बावजूद आम जनता में असंतोष बढ़ता नजर आ रहा है।
लोगों का कहना है कि अब समय आ गया है कि जनता स्वयं आगे आए, अपने अधिकारों के लिए आवाज बुलंद करे और जिला प्रशासन व जनप्रतिनिधियों को जमीनी हकीकत का आईना दिखाए। खासकर गरीब और रोज़ कमाने-खाने वाले परिवारों के हितों की रक्षा के लिए निष्पक्ष और पारदर्शी कार्रवाई की मांग की जा रही है।

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