7 लाख नगद-14 तोला सोना चोरी केस: हिरासत से भागा आरोपी, थाना प्रभारी घिरीं
थाना प्रभारी पर पहले से आरोप, अब जांच एएसपी को सौंपी गई*

दमोह देहात थाना में हिरासत से आरोपी फरार, बहुचर्चित चोरी कांड में पुलिस पर उठे सवाल*
14 तोला सोना, 7 लाख नकद और 2.5 किलो चांदी की चोरी का मामला
अभिषेक जैन पत्रकार दमोह
दमोह। देहात थाना क्षेत्र के केशवनगर में वरिष्ठ अधिवक्ता रामनारायण गर्ग के सूने मकान में हुई बहुचर्चित चोरी के मामले ने नया मोड़ ले लिया है। पुलिस हिरासत में लिया गया आरोपी संतोष काछी रविवार रात थाने से फरार हो गया। इस घटनाक्रम के बाद देहात थाना पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
15-16 दिसंबर की दरम्यानी रात हुई थी वारदात

अधिवक्ता रामनारायण गर्ग सपरिवार उज्जैन प्रवास पर थे, इसी दौरान 15-16 दिसंबर 2025 की रात अज्ञात चोरों ने केशवनगर स्थित किराए के मकान का ताला तोड़कर चोरी की वारदात को अंजाम दिया। शिकायत के आधार पर 17 दिसंबर 2025 को देहात थाना में अपराध क्रमांक 854/2025 धारा 331(4), 305(ए) बीएनएस के तहत मामला दर्ज किया गया।
फरियादी के अनुसार चोरी में करीब 14 तोला सोना, 7 लाख रुपये नकद और लगभग 2.5 किलो चांदी के जेवरात ले जाए गए थे।
एक आरोपी गिरफ्तार, चुपचाप जेल भेजा
पुलिस ने एक सप्ताह के भीतर ग्राम किशुनगंज निवासी जयराम उर्फ संतु पटेल को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया था। हालांकि, इस कार्रवाई की सार्वजनिक जानकारी सीमित रखे जाने पर भी चर्चा रही।
थाना प्रभारी पर गंभीर आरोप
फरियादी अधिवक्ता ने देहात थाना प्रभारी रचना मिश्रा पर जब्ती में गड़बड़ी और सहआरोपियों को छोड़ने के आरोप लगाए। 5 फरवरी को पुलिस अधीक्षक को तथा 12 फरवरी को आईजी सागर और डीजीपी भोपाल को लिखित शिकायत दी गई। मामले में हाईकोर्ट में रिट याचिका भी दायर की गई है।

अब हिरासत से फरारी

इसी प्रकरण में फरार चल रहे संतोष काछी जयराम के पिता को पुलिस ने पकड़ा था। बताया जा रहा है कि उस पर दो हजार रुपये का इनाम भी घोषित था। पूछताछ के लिए पहले सागर नाका चौकी में रखा गया, बाद में देहात थाना लाया गया।
नगर पुलिस अधीक्षक हरिराम पांडे के अनुसार, थाने में शौच के लिए ले जाते समय आरोपी अंधेरे का फायदा उठाकर पुलिस को चकमा देकर फरार हो गया।
सूत्रों का दावा है कि आरोपी को तीन दिन से अभिरक्षा में रखा गया था और हथकड़ी भी लगी थी। ऐसे में थाने से फरारी ने सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जांच एएसपी को सौंपी
पुलिस अधीक्षक श्रुतकीर्ति सोमवंशी ने मामले को गंभीर मानते हुए अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सुजीत सिंह भदौरिया को जांच सौंपी है। एसपी ने माना कि प्रथम दृष्टया लापरवाही प्रतीत हो रही है। जांच में यह स्पष्ट किया जाएगा कि आरोपी को कहां से लाया गया, किस परिस्थिति में फरार हुआ और किन कर्मचारियों की जिम्मेदारी बनती है।
सूत्रों के अनुसार एक आरक्षक समेत अन्य कर्मचारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में है।
उठ रहे सवाल
• जब थाना परिसर में लाकर मौजूद है तो आरोपी कैसे फरार हुआ?
• यदि हथकड़ी लगी थी तो उसने खुद को कैसे छुड़ाया?
• तीन दिन तक अभिरक्षा में रखने की सूचना वरिष्ठ अधिकारियों को क्यों नहीं दी गई?
• क्या पूरे मामले में लापरवाही से ज्यादा कुछ और भी है?
अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि फरार आरोपी दोबारा पकड़ा जाता है या नहीं, और जांच में किस स्तर तक जवाबदेही तय होती है। बहुचर्चित चोरी कांड में पहले से घेरे में रही देहात थाना पुलिस के सामने अब साख बचाने की बड़ी चुनौती है।




