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होलिका दहन से पहले दमोह में सजी आस्था की मूर्तियां, परंपरा निभा रहे मूर्तिकारों को नहीं मिल रहा सहयोग

होलिका दहन से पहले दमोह में सजी आस्था की मूर्तियां, परंपरा निभा रहे मूर्तिकारों को नहीं मिल रहा सहयोग

दमोह। रंगों के पर्व से पहले शहर में आस्था और कला की अनूठी झलक देखने को मिल रही है। दमोह में वर्षों से पारंपरिक मूर्तिकला से जुड़े कलाकार एक माह पहले से दिन-रात मेहनत कर होलिका दहन के अवसर पर विशेष मूर्तियां तैयार करते हैं। इन मूर्तियों को होलिका दहन से एक दिन पहले बाजार में सजाया जाता है, जिससे पूरे शहर में रौनक और उत्साह का माहौल बन जाता है। इस वर्ष 3 मार्च 2026, सोमवार को होलिका दहन का शुभ मुहूर्त माना गया है। देर रात से ही मूर्तिकार अपनी-अपनी प्रतिमाएं लेकर बाजार की ओर निकल पड़े, ताकि सुबह होते ही फुटपाथों और मुख्य मार्गों पर कला की छटा बिखर सके। दिन चढ़ते ही बाजार रंग-बिरंगी मूर्तियों से सज जाएगा और लोगों की भीड़ उमड़ने लगेगी।

<span;>स्थानीय मूर्तिकारों का कहना है कि उनका उद्देश्य केवल कमाई करना नहीं, बल्कि अपनी कला को शहर के अलग-अलग क्षेत्रों तक पहुंचाना और परंपरा को जीवित रखना है। वर्षों से यह परंपरा चली आ रही है, लेकिन अब न तो प्रशासन की ओर से कोई विशेष व्यवस्था या सहयोग मिलता है और न ही समाज का वह सम्मान, जिसकी ये कलाकार अपेक्षा रखते हैं।

मूर्तिकार पंचम चक्रवर्ती का कहना है कि वे इस कला को सेवा और श्रद्धा की भावना से करते हैं। वे चाहते हैं कि नई पीढ़ी इस परंपरा को समझे, कला का सम्मान करे और इसे आगे बढ़ाए। उनका मानना है कि अगर प्रशासन और समाज साथ दे, तो यह परंपरा और भी भव्य रूप ले सकती है।

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