ग्राम फतेहपुर जांच पर सवाल: जिन अफसर ने की पड़ताल, वही अब आरोपी, जांच करने वाला ही बना आरोपी: प्रशांत सिंह ठाकुर पर हटा कोर्ट का बड़ा एक्शन

ग्राम फतेहपुर जांच पर सवाल: जिन अफसर ने की पड़ताल, वही अब आरोपी, जांच करने वाला ही बना आरोपी: प्रशांत सिंह ठाकुर पर हटा कोर्ट का बड़ा एक्शन
दमोह। हटा न्यायालय के ताजा आदेश के बाद ग्राम पंचायत फतेहपुर की जांच अब खुद सवालों के घेरे में आ गई है। जिस जांच रिपोर्ट के आधार पर पंचायत में अनियमितताओं का खुलासा हुआ था, उसी जांच से जुड़े अधिकारी प्रशांत सिंह ठाकुर (सहायक परियोजना अधिकारी, जिला पंचायत) को अदालत ने शिक्षक आत्महत्या मामले में आरोपी बना दिया है। इससे जांच की निष्पक्षता और विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्न खड़े हो गए हैं।
जांच में क्या-क्या निकला था
फतेहपुर पंचायत की जांच, जिला पंचायत के आदेश पर की गई थी, जिसमें मौके पर निरीक्षण कर कई अनियमितताएं सामने आईं पंचायत की समितियों की बैठकों का कोई रिकॉर्ड नहीं,कई निर्माण कार्यों में माप-पुस्तिका का सत्यापन अधूरा,मनरेगा कार्यों में खर्च और वास्तविक काम में अंतर,परकोलेशन टैंक जैसे निर्माण कार्यों का गलत स्थल चयन,हाट-बाजार, चबूतरा, शेड निर्माण में प्रक्रिया का पालन नहीं,नल-जल योजना की सामग्री का अन्य कार्यों में उपयोग, रिपोर्ट में कई जगह “सहायक यंत्री द्वारा सत्यापन नहीं” जैसी गंभीर टिप्पणियां दर्ज हैं, जो तकनीकी निगरानी में लापरवाही की ओर इशारा करती हैं।
अब क्यों घिर गई जांच
सबसे बड़ा सवाल इस बात पर है कि जिस अधिकारी ने खुद इन अनियमितताओं की जांच की, वही अब एक गंभीर आपराधिक मामले में आरोपी हुआ है ऐसे में यह आशंका जताई जा रही है कि क्या जांच निष्पक्ष थी या प्रभावित?,क्या कुछ तथ्यों को जानबूझकर नजरअंदाज किया गया?,क्या जांच का उपयोग किसी बड़े खेल को छिपाने के लिए हुआ?
पुराने विवाद भी आए सामने
सूत्रों की जानकारी के मुरबिक जिले में मनरेगा से जुड़े लेखाधिकारी रामजी कुर्मी की लंबे समय से एक ही जगह पदस्थापना भी चर्चा में है। उन पर राजनीतिक संरक्षण के आरोप है। जिससे सिस्टम की पारदर्शिता पर सवाल उठते हैं।




