दमोह
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जनपद पंचायत दमोह में नियम विरुद्ध वेतन आहरण का मामला, शिकायतों के बाद भी कार्रवाई शून्य

वरिष्ठ अधिकारियों की उदासीनता से लीपापोती के आरोप, शासकीय खजाने को लाखों की क्षति

जनपद पंचायत दमोह में नियम विरुद्ध वेतन आहरण का मामला, शिकायतों के बाद भी कार्रवाई शून्य

वरिष्ठ अधिकारियों की उदासीनता से लीपापोती के आरोप, शासकीय खजाने को लाखों की क्षति

दमोह। जनपद पंचायत दमोह में पूर्व लेखपाल श्री असलम खान द्वारा नियम विरुद्ध संविदा वेतन आहरण का गंभीर मामला सामने आया है। आरोप है कि सेवानिवृत्ति के बाद संविदा नियुक्ति के दौरान शासन के स्पष्ट नियमों की अनदेखी कर प्रतिमाह ₹79,114 का भुगतान किया गया, जिससे शासकीय खजाने को आर्थिक क्षति पहुँची। हैरानी की बात यह है कि इस संबंध में कई बार लिखित शिकायतें दिए जाने के बावजूद जिला एवं जनपद पंचायत के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, दिनांक 02 फरवरी 2024 को जनपद पंचायत दमोह द्वारा आदेश क्रमांक क/स्था./जन.प./540/24 के तहत सेवानिवृत्त लेखपाल श्री असलम खान को संविदा आधार पर नियुक्त किया गया। यह नियुक्ति मध्यप्रदेश शासन के सामान्य प्रशासन विभाग के आदेश क्रमांक 3/319/2010/1/3 दिनांक 6 अक्टूबर 2010 के अंतर्गत की गई थी, जिसमें स्पष्ट प्रावधान है कि संविदा नियुक्ति की स्थिति में पेंशन व महंगाई राहत घटाकर शेष राशि ही संविदा वेतन के रूप में देय होगी।
इसके बावजूद आरोप है कि श्री असलम खान द्वारा नियमों के विपरीत पूर्ण वेतन संरचना के आधार पर ₹79,114 प्रतिमाह का भुगतान आहरित किया गया। इससे जनपद पंचायत को आर्थिक हानि हुई, जिसकी रिकवरी आज तक नहीं की गई। शिकायतकर्ता का कहना है कि तत्कालीन मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्रीमती पूनम दुबे ने भी इस अनियमितता पर कोई आपत्ति दर्ज नहीं की, जिससे अधिकारियों की मिलीभगत और लापरवाही के आरोप और गहरे हो गए हैं।
मामले को लेकर दिनांक 11 दिसंबर 2025 एवं 22 जुलाई 2025 को मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत दमोह को लिखित शिकायतें दी गईं, लेकिन आज दिनांक तक न तो जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की गई और न ही अधिक वेतन की रिकवरी की गई। इसके अलावा सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत मांगी गई जानकारी भी उपलब्ध नहीं कराई गई, जिससे पूरे मामले में लीपापोती के प्रयासों की आशंका जताई जा रही है।
शिकायत में यह भी उल्लेख है कि राजपत्र क्रमांक 526 दिनांक 28 सितंबर 2017 के अनुसार संविदा नियुक्ति में वित्त विभाग की पूर्व सहमति आवश्यक होती है, जबकि आरटीआई के माध्यम से प्राप्त दस्तावेजों में ऐसी किसी अनुमति का उल्लेख नहीं मिला है। यही नहीं, संविदा अनुबंध में भी यह स्पष्ट नहीं किया गया कि श्री असलम खान को कितनी राशि का भुगतान किया जाना था।
मामले को लेकर जिला पंचायत सीईओ एवं जिला प्रशासन की चुप्पी पर सवाल उठ रहे हैं। शिकायतकर्ता ने जिला कलेक्टर एवं जिला पंचायत सीईओ से निष्पक्ष जांच, अधिक वेतन की रिकवरी तथा दोषी अधिकारियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की मांग की है।

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